Wednesday, December 31, 2025

नववर्ष : औपचारिक शुभकामनाओं से सच्चे संकल्प तक

 


नववर्ष : औपचारिक शुभकामनाओं से सच्चे संकल्प तक

आचार्य रमेश सचदेवा (शिक्षाविद एवं विचारक)
नया साल आते ही संदेशों का सिलसिला शुरू हो जाता है—
            
नए साल में आपके सपने पूरे हों,         
नया साल, नई कहानियाँ,          
हर प्रयास सफलता में बदले
ये शब्द सुंदर हैं, सकारात्मक हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या ये केवल औपचारिकता बनकर रह जाते हैं, या हमारे भीतर सचमुच कुछ बदलते भी हैं?

नववर्ष का अर्थ कैलेंडर बदलना नहीं, नज़रिये का बदलना होना चाहिए। यदि हर साल वही इच्छाएँ, वही वाक्य और वही आदतें दोहराई जाती रहीं, तो नया साल केवल तारीख़ों का फेर बनकर रह जाएगा। संदेश देना या पढ़ना तब तक सार्थक नहीं होता, जब तक वह हमें सोचने, सीखने और बेहतर बनने के लिए प्रेरित न करे।

हमें यह स्वीकार करना होगा कि दुनिया को बदलने का बोझ उठाने से पहले, खुद को बदलना सबसे ज़रूरी है। जब हम अपने व्यवहार में थोड़ी विनम्रता, अपने विचारों में थोड़ी सकारात्मकता और अपने कर्मों में थोड़ी जिम्मेदारी जोड़ते हैं, तभी समाज अपने आप बदलने लगता है। बड़ा परिवर्तन छोटे-छोटे संकल्पों से ही जन्म लेता है।

इस नए साल में संकल्प बड़े नहीं, सच्चे हों—         
हम अधिक शिकायत नहीं, अधिक समाधान ढूँढेंगे।            
हम केवल अपने लिए नहीं, दूसरों के काम भी आएँगे।      
हम निराशा फैलाने के बजाय आशा का कारण बनेंगे।      
और सबसे ज़रूरी—हम शब्दों से ज़्यादा कर्म पर विश्वास करेंगे।

नववर्ष 2026 की सार्थकता इसी में है कि हम बीते वर्ष की परेशानियों को केवल भूलें नहीं, उनसे सीखें। आशीर्वाद केवल आगे बढ़ाएँ नहीं, बल्कि उन्हें अपने आचरण में उतारें। जब संदेश औपचारिकता से निकलकर जीवन-शैली बन जाए, तभी नया साल सच में नया बनता है।

आइए, इस नववर्ष पर यह संकल्प लें कि हम दुनिया को बदलने की घोषणा नहीं करेंगे, बल्कि खुद को बेहतर बनाकर बदलाव की शुरुआत करेंगे। यही सच्चा नववर्ष संदेश है—सरल, हार्दिक और सकारात्मक।

 

1 comment:

Amit Behal said...

नव संकल्पों से भरपूर नूतन वर्ष की हार्दिक मंगलकामनाएं💐🙏