विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून : प्रकृति को बचाना, भविष्य को बचाना
"पेड़ हमें जीवन देते हैं,
और हम उन्हें
क्या देते हैं?" यह प्रश्न आज हर व्यक्ति को स्वयं से पूछना चाहिए। हर वर्ष 5
जून को विश्व
पर्यावरण दिवस मनाया जाता है, ताकि लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा
सके। लेकिन केवल एक दिन पर्यावरण की बात करना पर्याप्त नहीं है। आवश्यकता है कि हम
इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।
आज मानव विकास की दौड़ में प्रकृति को लगातार
नुकसान पहुँचा रहा है। जंगल कट रहे हैं, नदियाँ प्रदूषित हो रही हैं, हवा जहरीली
होती जा रही है और धरती का तापमान बढ़ रहा है। इसका परिणाम हमें असामान्य मौसम,
सूखा, बाढ़, भीषण गर्मी और
नई-नई बीमारियों के रूप में देखने को मिल रहा है।
एक छोटी-सी कहानी हमें बहुत बड़ी सीख देती है।
एक गाँव में एक वृद्ध व्यक्ति प्रतिदिन एक पौधा लगाता था। लोगों ने पूछा,
"आपकी उम्र तो बहुत हो चुकी है, इन पेड़ों का फल तो आप नहीं खा पाएंगे।" वृद्ध
मुस्कुराया और बोला, "मैं उन पेड़ों का फल खा रहा हूँ जिन्हें मेरे पूर्वजों ने
लगाया था। अब मेरी जिम्मेदारी है कि मैं आने वाली पीढ़ियों के लिए पेड़
लगाऊँ।"
यह कहानी हमें बताती है कि पर्यावरण संरक्षण
केवल अपने लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी आवश्यक है।
हम अक्सर सोचते हैं कि पर्यावरण बचाने का काम
सरकार या बड़ी संस्थाओं का है। लेकिन सच यह है कि परिवर्तन की शुरुआत हमारे घर से
होती है। यदि प्रत्येक व्यक्ति वर्ष में केवल एक पेड़ लगाए, पानी की बर्बादी रोके,
प्लास्टिक का
कम उपयोग करे और स्वच्छता का ध्यान रखे, तो पूरे देश का स्वरूप बदल सकता है।
विद्यार्थियों की इसमें विशेष भूमिका है। वे
अपने परिवार और समाज को जागरूक कर सकते हैं। स्कूलों में वृक्षारोपण अभियान,
जल संरक्षण
कार्यक्रम और स्वच्छता अभियान चलाकर पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी विकसित की जा
सकती है।
याद रखिए, प्रकृति के बिना मानव जीवन
की कल्पना भी नहीं की जा सकती। हमें शुद्ध वायु, स्वच्छ जल, भोजन और जीवन
की हर आवश्यक वस्तु प्रकृति से ही प्राप्त होती है। यदि हम प्रकृति को नष्ट करेंगे,
तो अंततः अपना
ही भविष्य नष्ट करेंगे।
आइए, इस विश्व पर्यावरण दिवस पर हम संकल्प लें—
- हर वर्ष कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएंगे।
- जल और बिजली की बचत करेंगे।
- प्लास्टिक का उपयोग कम करेंगे।
- अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखेंगे।
- दूसरों को भी पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करेंगे।
धरती हमारी नहीं, बल्कि हम धरती के हैं। यदि
हम आज पर्यावरण की रक्षा करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें धन्यवाद देंगी। आइए मिलकर एक
हरित, स्वच्छ और सुंदर भारत का निर्माण करें।
संदेश:
"एक पेड़, एक जीवन; एक संकल्प, एक उज्ज्वल भविष्य।"
आचार्य रमेश सचदेवा
शिक्षाविद एवं विचारक
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